वो बचपन की यादें।

वो बचपन की यादें जो याद आते ही मन प्रफुलित हो जाता है इतने वर्ष बीत गए। फिर भी उन यादों को संजोए हैं, नटखट चंचल सा व्यवहार देखकर घर में मां बाप का डांटना। जब भी मैं समय यात्रा पर फिल्म देखता हूं तो सोचता हूं मै भी एक समय यात्री हो जाऊं और चला जाऊ उस बचपन में जहां कंचे, गोली और गीली डंडा खेलने। मां हमेशा कहा करती थी गिल्ली डंडा नहीं खेलना चाहिए। गिल्ली से आंखों में लगकर आंखों को छत्ती पहुंचने का डर होता है। बचपन में बचे तो नासमझ होते हैं कितना भी मां बाप समझाए फिर भी हमलोग उनकी एक नहीं सुनते थे। हमारे शिक्षक के पास के घर से कंप्लेन कर दिया जाता था, आपका छात्र गोली गोली और गीली डंडा खेलता है। मास्टर साहब पूछकर पीट दिया करते थे। फिर भी ये खेल नहीं छोड़ पाते थे।

मेरा जन्म गांव में हुआ है गांव में चारों तरफ हरियाली होती है जहां भी देखो लोग बैल, गाय, भैंस, बकरी जैसे मवेशियों को पालते हुए मिल जाएंगे। जब मै छोटा था उस वक्त विज्ञान ने ज्यादा तरक्की नहीं किया था लोग खेत को ट्रैक्टर से नहीं बल्कि बैल से जोता करते थे। ट्रैक्टर की जगह टायर बैल लिया था। एक बहुत पुरानी फिल्म हीरो ” सचिन ” की है उस फिल्म का नाम नदिया का पार हैं उस फिल्म में गांव का रहन सहन को दर्शाया गया है फिल्म का एक गाना ” कितने दूर अब कितने पास है ये चंदन तोहड़ा गांव हो ” इसमें टायर और बैल को दिखाया गया है ये गाना इतना पुराना होकर भी लोगो के दिलों पर राज करता है। आज भी इस फिल्म और गाने की लोकप्रियता काफी है। Instagram Star सब इस गाने पर वीडियो रील बनाया करते हैं। मैं भी ये फिल्म देखा था तो काफी पसंद किया था। पसंद आनेवाली मूवी है ही।

एक समय ऐसा भी था जब हमारे यहां किसी के पास मोबाइल नहीं होता था वो दौर टेलीफोन का था मेरे पिता जी टेलीफोन के लिए Apply तो किए थे लेकिन कभी न लगा सके। हमलोगों को बात करना होता था तो टेलीफोन बूथ में जाकर बात कर लिया करते थे। विज्ञान ने अंगड़ाई लिया और मार्केट में मोबाइल को लॉन्च किया। सबसे पहले हमारे घर में Nokia का मोबाइल खरीदा कर आया, जिसे छत पर एंटीना के द्वारा जोड़ा गया बिना एंटीना का Network ही नहीं रहता था। मोबाइल को देखकर मै काफी प्रफुलित हो गया था , मै अपने जेब में मोबाइल को रखकर लोगो को दिखाने ले जाता था। हालांकि जेब में मोबाइल रखने के कारण नेटवर्क नहीं रहता था। फिर भी Show Off तो बनता है। वह एक दौर था जब Nokia लोगों के घरों में राज किया करता था आज एक दौर है जहां Nokia मोबाइल को लोग भूल चुके हैं। प्राचीन कहावत है जो समय के साथ नहीं बदलता है समय बदलकर उसे सबक सिखाता है Nokia के साथ भी यही हुआ शायद Nokia समय के साथ नहीं बदला जिस कारण लोग अपनी मोबाइल का कंपनी ही बदल दिए।

आज दुनिया पर Apple, Vivo, Oppo, Sumsang, Realme जैसी कंपनी राज कर रही है। जिस मोबाइल को लेकर अपना बचपन गुजारा है उस कंपनी का ये दुर्दशा देखकर आंखे नम हो जाती है बचपन की यादें को संजोकर ही मै आगे की यादें बना रहा हूं । ऐसा नहीं है कि उस समय आपको किसी से प्रेम नहीं हुआ होगा। जब मै छोटा था तो एक लड़की मेरा पीछा किया करती थी नासमझ होने के कारण मैं उसके इरादों को नहीं समझ पाता था। जब कभी उसे समय मिलता था मेरे पास आकर मेरे से बात करने लग जाती थी। जब मै आठवीं कक्षा में था तो वो लड़की मेरे परीक्षा कमरे में घुसकर मुझे चिट देने आई थी। सारे छात्रों की नजर मेरे और उसपे चला गया जब वो नाम लेकर बोली कॉपी लोगे कॉपी का अर्थ चिट था मै उस समय हक्का बक्का रह गया जिसके कारण मैने मना कर दिया। फिर क्या था विद्यालय के सारे छात्र मेरे और उसका नाम एकसाथ जोड़कर चिढ़ाने लगे, मै कभी कभी चिढ़ भी जाया करता था।

आज जब मै इतना बड़ा हो गया हुं तो उसके बारे में सोचता हुं और कहता हूं काश मैं उसकी मोहब्बत को समझा होता। कितना नासमझ था मै। एक लड़की होकर अपना स्वाभिमान दांव पर लगाकर मेरा पीछा करती थी फिर भी उसकी मोहब्बत से मै अनजान रहा, कभी कभी मै उसे डांट भी दिया करता था फिर भी बुरा नहीं मानती थी। आज मै उन सारी मोहब्बत को महसूस कर रहा हूं । कोई किसी के पीछे पड़े और वो भाव न दे तो दिल में कितना चुभन होता होगा। पहचान तो मै उनका जाहिर नहीं कर सकता लेकिन माफी मांगना चाह रहा हुं ” इस पोस्ट से ” नासमझ था जो मै आपकी मोहब्बत को न समझ पाया। कसूरवार बन गया मैं।

समय यात्रा तो अभी नहीं किया जा सकता जो मै पीछे उस समय में जाकर अपनी गलतियों पर पश्चाताप कर सकूं। समय है ही ऐसा जो निरंतर आगे बढ़ता है समय से पीछे लोग बहुत अनजान सफर को छोड़ देता है जो बाद में जाकर एक यादें बनकर रह जाती है विद्यालय से मै परीक्षा देकर पास हो गया उसके बाद महाविद्यालय में प्रवेश किया। महाविद्यालय में पढ़ाई नहीं होता था इसलिए मैं पढ़ने के लिए राजधानी में चला गया। मै विज्ञान संकाय का छात्र था Math और विज्ञान पढ़ने के लिए अलग अलग कोचिंग ज्वाइन कर पढ़ने लगा। उसमें काफी सारे छात्र मेरे मित्र बन गए लेकिन मैं मित्रता बहुत सोच समझकर करते आ रहा हूं इस वजह से राजधानी में इतने साल गुजारने के बाद भी मेरे एक ही मित्र बन पाए। आज के समय में उस मित्र का स्टेशन मास्टर के रूप में सरकारी नौकरी लग गया है उससे बात किया हुआ काफी समय हो गया है उसे भी नौकरी लग गया है तो अपनी जिंदगी में व्यस्त हो गया है।

शायद इसलिए अब हमसे बात नहीं हो पाती है। मै काफी खुश हूं एक मित्र मेरा संघर्ष किया और वो ऊंचे पद पर चला गया।

मैं अपनी बात करूं तो मित्रों मेरी कोशिश Book Writer और Youtuber बनने का है इस आर्टिकल को आपने पढ़ा मेरा आपसे एक सवाल है ये Article पढ़कर कैसा लगा। क्या मै कोई किताब लिख पाऊंगा? ये Comment करके जरूर बताए।।। पोस्ट पढ़ने के लिए धन्यवाद।।

2 thoughts on “वो बचपन की यादें।”

Leave a Comment