
ये क्या हो रहा है भारत में जिधर भी नजर दौड़ाओ वहां मानसिक गुलाम लोग ही मिलते हैं। मैने भारत में भ्रमण किया। मैं वो जगह ढूंढ रहा था जहां सुकून भरा हो जहां लोग वैज्ञानिकता की बात कर रहे हो। लेकिन यहां तो लोग कांवर ढोने में व्यस्त है। दिल्ली में एक कांवरिया से पूछ ताक्ष किया तो वो बता रहा था हम सभी 250 Km दूर से पैदल आ रहे हैं मैने उससे पूछा खाली पैर से आए हो पैर में छाले नहीं पड़े। इतना मेहनत करने की जरूरत क्या है। भारत में इतने लोग कांवरिया लेकर जाते हैं क्या वे पैसे वाले हो गए क्या मिला उन्हें इतना मेहनत करके। फिर उसका कहना था मिलता तो कुछ नहीं आस्था होता है मैने उससे कहा बड़े बड़े अफसर वो पढ़कर बनते हैं वो कभी इस आस्था में नहीं पड़ते है। फिर भी वो अमीर बनते जाते हैं। आपने देखा है कोई बड़ा अफसर कांवरिया को ढो रहा हो। इसपर वो बोला नहीं कांवरिया को ढोने के लिए अमीरों के पास समय ही नहीं है हम कांवरिया ही जल चढ़ाते है उसने कहा ब्राह्मण को देखते हों कितना हमलोगों को सपोर्ट करता है। मैने कहा ब्राह्मण को सिर्फ ब्राह्मण न बोले विदेशी यूरेशियन ब्राह्मण बोले। वो बोला ब्राह्मण विदेशी कैसे हो गया हमारे यहां तो भारत में ही जन्मा है बाहर देश से आया होता तब न विदेशी कहते। मैने कहा आप News देखते हैं? उसने कहा हां। मैने कहा भारत में रोहंगियो बसता है उसको बोला जाता है देश से बाहर से आया है कब भारत में आया मुझे भी नहीं पता लेकिन बोलता है वो विदेशी है।
उसी प्रकार से ब्राह्मण यूरेशिया से 1500 से 2000 ईसा पूर्व भारत में आया था। राखीगढ़ी जो हरियाणा में पड़ता है वहां स्त्री का मानव कंकाल मिला जो 4700 ईसा पूर्व का था उसमें ब्राह्मण का DNA 🧬 नहीं मिला जबकि मूल भारतीयों का DNA 🧬 मिल गया। 117 विदेशी वैज्ञानिकों ने DNA का रिसर्च करके उसका परिणाम घोषित किया। तब वो बोला ये तो मुझे नहीं पता था। हमारे यहां ब्राह्मण से लोग पूजा पाठ करवाते है। उसे विदेशी नहीं कहते है फिर मैने बोला ब्राह्मण एक जाती को उच्च दूसरे जाती को नीच क्यों कहते हैं उसने बोला हमलोग तो छोटी जाती में आते हैं इसलिए नीच जाती कहा जाता है। मैने उससे पूछा आप किस वर्ग में आते हैं उसने कहा OBC में। मैने कहा आप खुद से खुद को छोटी जाती कहोगे तो सभी छोटी जाती बोलेगा।
दुनिया में इतना सारा देश है भारत को छोड़कर कही भी उच्च नीच जाती का भेद भाव है। वहां कांवरिया लेकर लेकर घूमता है फिर भी सभी काफी पढ़े लिखे अमीर है उसने कहा आपने बहुत सारी बातों को समझाया है हमे। भारत में अंधविश्वास को बढ़ावा ब्राह्मण देता है विदेशी ब्राह्मण तो धर्म को ही धंधा बना लिया है यूरेशियन ब्राह्मण कहता है मंदिर में भगवान रहते हैं और भगवान के हमलोग संदेशवाहक हैं। भारतीय फिल्म PK जो अमीर खान का है उसमें Wrong Number कहके लोगो को समझाया गया है। हाल ही में सिनेमा हाल में लगा Saiyara Movie देखकर लोग रोने लगे। इसका मतलब यही न हुआ Saiyara मूवी को लोगोबने काफी ध्यान पूर्वक देखा। उसके दर्द को अपना दर्द से जोड़ लिया । उसके फीलिंग को अपने फिलिंग के साथ जोड़ लिया तब ही तो आंखों से आंसु गिराने लगे
अमीर खान का PK Movie को लोगो के द्वारा उसके Wrong Number को अपने Wrong Number से जोड़ा होता उसके शब्दों को अपने शब्दों से जोड़ा होता तो काफी लोग धर्म और भगवान की परिभाषा समझ गए होते। उस फिल्म में एक व्यक्ति खुदको भगवान का संदेशवाहक कहते हैं अमीर खान बाहरी दुनिया मतलब दूसरे ग्रह से आए हुए रहते हैं। उसका Space Ship 🚀 का रिमोट उसके गले में रहता हैं जो चोर के द्वारा उसके गले का रिमोट चुराकर भगवान के संदेशवाहक बाबा को दे देता है। उस रिमोट को शिव जी का टूटा हुआ मनका कहके लोगो में प्रचलित करता हैं। उसे देखकर अमीर खान कहते है ये शिव जी का टूटा हुआ मनका नहीं है ये तो मेरा घर जाए खातिर स्पेस शिप का रिमोट कंट्रोल है जो चोरी हो गया था। इसे मुझे दे दो। इस पर संदेशवाहक अमीर खान को बाहर निकलवा देता है।
एक साधारण अमीर खान अब रिमोट ले तो ले कैसे इतने बड़े बाबा से। खुद का रिमोट लेना उससे कोई मामूली बात नहीं था। फिर भी एक बाबा से तर्क करके अपना रिमोट लिया। यहां भी शिक्षा काम आई अगर अमीर खान शिक्षित नहीं होता तो क्या वो रिमोट ले पाता। मुझे तो लगता है शायद नहीं। शिक्षा बहुत जरूरी है बड़े बड़े अफसर जो गोली बंदूक चलाने का ट्रेनिंग भी नहीं लेते हैं पुलिस जो गोली बंदूक चलाना जानते है उसका अधिकारी अफसर होते हैं अफसर का चुनाव शिक्षा से होता है। डॉ अम्बेडकर ने कहा है एक रोटी कम खाओ फिर भी अपने बच्चे को पढ़ाओ। संविधान बने इतने वर्ष गुजर जाने के बाद भी लोग अंधविश्वास को त्याग नहीं कर पा रहे हैं वहीं शिक्षित लोग अंधविश्वास को त्यागकर वास्तविक हो गए है। अशिक्षित तो अभी भी कांवरिया ढोने में व्यस्त है।
सती प्रथा कानून पर प्रतिबंध लगा दिया गया है जरा सोचकर देखे अभी के समय में सती प्रथा चालु होता तो शिक्षित और अशिक्षित(अनपढ़) की राय क्या होता। शिक्षित लोग कहते ये गलत है इस तरह से सती प्रथा के नाम पर स्त्रियों को जिंदा जलाना। वहीं अनपढ़ कुछ सोच ही नहीं पाते। शिक्षा नहीं होने के कारण दिमाग कमजोर हो जाता है फिर उसे सही गलत का अंदेशा नहीं रहता है वो तो सती प्रथा को भगवान का बनाया हुआ कानून बोलकर सही ठहराता। सती प्रथा जब चालू था उस समय यही हुआ है उस समय पढ़े लिखे कम थे सिर्फ ब्राह्मणों को शिक्षा लेने का अधिकार था। विदेशी यूरेशियन जैसा चाहे वैसा नियम कानून बना देते थे। वो यूरेशियन विदेशी ब्राह्मण कितना हिंसात्मक रहा होगा जो सती प्रथा जिसमें स्त्री को जिंदा जला दिया जाता था वो बनाया होगा। विदेशी यूरेशियन ब्राह्मण खुद को श्रेष्ठ बनाने के लिए दूसरे को नीच बोलते हुए भी नहीं थकते हैं।
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