2002 में हुए गुजरात दंगा की आपबीती आज भी डरा देती है।

वो एक समय था जब कही भी निकल जाते थे घूमने के लिए। दुनिया के बारे में भी कम जानते थे। कोई जबरदस्ती हमे धर्म के बारे में नहीं बताने आता था। लेकिन हां टीवी अखबार धर्म से भरा परा मिलता था। हाल ही में जिस प्रकार से राजस्थान में माध्यमिक विद्यालय गिर गया। जिसमें दबकर 7 बच्चों की मौत हो गई। स्कूल और पुल को तो काफी गिरते हुए हमने देखा है  लेकिन भारत में इतने सारे मंदिर है मंदिर को गिरते हुए हमने कभी नहीं सुना। मंदिर तो गरीबों का चंदा लेकर बनाया जाता है और काफी कीमती होता है। मंदिर में दान गरीब परिवार के लोग करते हैं उस दान का भागीदार सिर्फ मंदिर का पुजारी (ब्राह्मण) ही होता है। एक तरफ से ब्राह्मण लोगों को कहते हैं हम भिखारी है भीख मांगकर खाना हमारा कर्तव्य है। दूसरी तरफ से मंदिर का सारा चंदा पर अधिकार कर लेता है। भारत का सत्ता rss के द्वारा चलाया जाता है नरेंद्र मोदी को तो वैसे ही लोगो को दिखाने के लिए आगे खड़ा कर दिया गया है।

भारत के वासी देखे हमने OBC को प्रधानमंत्री बनाया है। नरेंद्र मोदी को चाय बेचने वाला प्रचलित किया गया। जहां भारत के प्रधानमंत्री जैसे ऊंचे पद पर शिक्षित लोगों को बैठना चाहिए। वहीं चाय बेचने वाले को बैठाना कितना उचित हैं इसपर आप ही फैसला करे। rss जानता है हम उच्च शिक्षा वाले को प्रधानमंत्री का पद देंगे तो वो उच्च शिक्षा वाला है उसका दिमाग तेज होगा उसका IQ Level  भी ज्यादा होगा। वैसा व्यक्ति हमलोगों का कहना नहीं मानेगा वो खुद का दिमाग इस्तेमाल करने लगेगा। हमे तो ऐसा व्यक्ति को आगे करना है जिसका दिमाग तेज न हो और IQ Level कम हो। IQ Level कम वाला व्यक्ति को जैसा कहेंगे वैसा करेगा। वो थोड़बे न Deeply सोच सकता है। भारत में rss के द्वारा दिमाग चलाकर भारत के मूलनिवासियों को इसी प्रकार से इस्तेमाल किया जाता है। भारत में गुजरात में 2002 में दंगा हुआ था उस समय गुजरात का मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत का प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई थे। गुजरात की एक मुस्लिम लड़की अपना आप बीती 2002 की दंगा को लोगो तक शेयर की जिसे पढ़ने का मौका मुझे भी मिला । मै पढ़कर दंग रह गया था। फिर सोचा इतना हैवानियत स्त्रियों के साथ 2002 दंगा में हुआ था। उसकी जुबानी कुछ अंश लिख रहा हूं।


मै सबाना बदला हुआ नाम दोस्तो के साथ खेलने गई थीं सूरज ढल रहा था। सभी सहेली अपने अपने घरों में जाने वाली थीं। मै अपने घर के तरफ चल दी। हूं तो मैं खूबसूरत लेकिन मैं घर में बुर्का नहीं पहनती हूं। मुझे विद्यालय जाना होता है तो बुर्का पहनकर जाती हूं। घर में आते ही कल पर अपने पैर और मुंह को अच्छी तरह से धोकर, बिजली नहीं रहने के कारण लालटेन को जलाने चली गई। अम्मी जान ने कहा लालटेन को जलाकर पढ़ने चली जाओ। मैने भी वैसा ही किया। मै अपने छोटे भाई के साथ पढ़ने लगी। इतने में बाहर में काफी शोरगुल होने लगा। हमारे मुहल्ले के बुजुर्ग कह रहे थे तुमलोग घर से बाहर मत निकलना चारों तरफ दंगा छिड़ गया हैं। हिंसा हो रहा है। मै उस समय इतना समझदार नहीं थी जो दंगा के बारे में जानती। फिर भी मेरी अम्मी जान बहुत डर रही थी। मैने अपनी अम्मी जान के चेहरे पर डर को महसूस कर पा रही थी।

मै उस काली रात को कैसे भूल सकती हूं जिसे मैं आज भी याद करती हूं तो मेरे शरीर में सिहरन पैदा होने लगता है। सोचती हूं काश वो रात आई न होती तो कितना अच्छा रहता। हमारे मुहल्ले में भगवान का नारा देने वाले लोग घुस गए। चारों तरफ चीखने चिलाने की आवाजें सुनाई दे रही थी। मेरी अम्मी जान मुझे और मेरे छोटे भाई को पकड़कर रोने लगी। मेरे अबू जान उस समय घर पर नहीं थे। बाहर गए थे। मेरी अम्मी जान कमरे के गेट को अच्छी तरह से Lock कर दी। इतने में भगवान की जयकारा लगाते हुए कुछ लोग आकर मेरे घर के गेट को जोड़ जोड़ से धकेलने की कोशिश करने लगे। हम सब काफी डर रहे थे अम्मी जान जोड़ जोड़ से रोने लगी। फिर भी किवाड़ तोड़ने की आवाज सुनाई दे रही थी। वो लोग रोने की आवाज को सुनकर भी गेट को तोड़ने की कोशिश नहीं छोड़ें। भगवान का नारा लगाते हुए वे लोग किवार को तोड़कर घर में घुस गए। एक व्यक्ति घर का सारा सामान बाहर फेंकने लगे। वहीं दूसरे व्यक्ति की आँखें गंदी नीयत से मेरी तरफ देखे जा रहा था। मेरी अम्मी जान उसकी नीयत को भांप गई और मेरे पास आकर मुझे कुछ न करने की मिन्नते उनलोगों से करने लगी। फिर भी वो लोग रहम करने का नाम ही नहीं ले रहे थे। मेरी अम्मी जान को एक तरफ धकेलकर मुझे कमरे में ले जाकर मेरे साथ उनलोगों ने बलात्कार किया।


आज के समय में मेरी निकाह हो चुकी है मेरे बच्चे भी है लेकिन फिर भी उस हैवानियत भरी रात से मै उबर नहीं पाई हूं। मै इस आप बीती को किसी के साथ शेयर नहीं करना चाहती थी। इसलिए मैं अपना बदला हुआ नाम लिख रही हूं 2002 दंगा में काफी लोग मारे गए थे इससे हम कह सकते है बलात्कार सिर्फ मेरे साथ ही नहीं काफी लड़कियों के साथ हुआ होगा। मै कभी कभी अकेले रहती थी तो उस समय को सोचकर रोने लगती थी। आज भी मेरे जैसे काफी लड़कियां अपनी इज्जत बचाने के लिए 2002 की हैवानियत भरी रात बलात्कार को शेयर नहीं की होगी। मै कभी कभी सोचती हूं मेरी इज्जत भी लुटा गया और मेरे कसूरवार को किसी प्रकार की सजा भी नहीं हुई। राज्य में कही हिंसा होता है तो उस राज्य का मुख्यमंत्री फिर प्रधानमंत्री जिम्मेवार होता हैं। उस मुख्यमंत्री के रहते हुए 2002 में इतना बड़ा दंगा बलात्कार हुआ। फिर भी उसे प्रधानमंत्री बना दिया गया। दिन रात मीडिया में इस्लाम धर्म के खिलाफ News को पड़ोसा जाता है। क्या भारत में फिरसे दंगा भड़काने का षडयंत्र हो रहा है।

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