
हाय मित्र आज मै एक जाती विशेष के बारे में लिखना चाह रहा हूं आप उस जाती के बारे में जानते भी होंगे, पर इतना आंतरिक तरीकों से उन्हें नहीं जानते होंगे। आपने मीडिया में उस समूह के लोगों को देखा होगा, बाहर से देखने से किसी वर्ग के बारे में ज्यादा नहीं जान पाएंगे। ज्यादा जानने के लिए उसके करीब जाना होगा, मैने देखा है भारत में जहां भी जाए जाती प्रथा हावी है। यहां लोग बुद्धि और ज्ञान से नहीं बल्कि जाती से श्रेष्ठ कहे जाते हैं। एक विशेष जाती जो सही से शिक्षा भी ग्रहण नहीं किया हो जिसके पास बुद्धिमता भी नहीं है फिर भी वो खुद को सबसे श्रेष्ठ, लोगो को बताते हैं। मेरी तो ये सब देखकर कभी कभी आंखे नम हो जाती है भारत में इतना ज्यादा जातिवाद हो क्यों रहा है आखिर भारत में जाती की आवश्यकता क्यों हो गई। एक जाती को श्रेष्ठ दूसरे को निम्न समझना जरूरी है क्या? आज से हजारों वर्ष पहले मौर्य वंश आया था जिसकी स्थापना चंद्रगुप्त मौर्य ने किया था। इतिहास के पन्नों में देखें तो चंद्रगुप्त मौर्य एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखते थे। वे भारत के महान सम्राट हो गए। चंद्रगुप्त मौर्य जब भारत की सता के तरफ कदम आगे बढ़ा रहे थे उस समय उसके आगे रास्ते में रुकावट दीवार बनकर जाती व्यवस्था नहीं आया होगा। ये सवाल बहुत महत्वपूर्ण है क्यों कि चंद्रगुप्त मौर्य एक निम्न जाति और गरीब परिवार से आते थे।
जिस प्रकार से निम्न जातियों को विशेष जातियों के द्वारा आगे बढ़ने नहीं दिया जाता है। प्राचीन कल में भारत में शिक्षा और विज्ञान की कमी था उस समय चंद्रगुप्त मौर्य भारत के शासक कैसे हुए होंगे। ये सोचने पर ये लगता है इस समय ये हाल है तो उस समय क्या स्थिति रहा होगा। प्राचीन काल में न्याय सिर्फ राजा के दरबार में मिलता था क्या राजा के पास इतना समय होता था जो अपनी सारी प्रजा को न्याय दे पाए। आज के समय में जगह-जगह पर न्यायालय बना हुआ है जिसमें अधिवक्ताओं के द्वारा न्याय के लिए संघर्ष किया जाता हैं फिर भी सभी को न्याय मिलना मुश्किल हो जाता है भारत में आबादी ही इतना ज्यादा है कि न्याय देने वाले न्यायालय ही कम पर जाते हैं, आज भी न्यायालय में काफी लोगों का केस Pending में परा हुआ है वजह जज को समय नहीं मिलने के कारण जज द्वारा बहस नहीं करवाया जाता है जिस कारण लोगो को जल्दी न्याय नहीं मिल पाता। राजशाही में तो इस प्रकार का न्यायालय भी नहीं था उस समय जनता को न्याय कैसे मिलता होगा ये सोचकर ही शरीर में सिहरन पैदा होता है। कुछ विशेष जाती जो हमेशा जाती मतभेद करवाकर निम्न जाति को दबाने की कोशिश करता रहता है वो इस न्यायालय को खत्म करना चाहते हैं।
सामूहिक रूप से उनलोगो ने ये कभी नहीं कहा है कि भारत का न्यायालय खत्म कर देंगे। लेकिन लोगो में जरूर प्रचार करते हैं कि भारत का संविधान हटना चाहिए। आखिर संविधान से उनलोगो को दिक्कत क्यों है क्या बिगाड़ता है संविधान उनका। जहां तक मैने भारत का संविधान का अध्ययन किया तो मुझे लगा ये संविधान भारत के लोगों को समानता का अधिकार देता है न्यायालय भी ज्यादा होने की वजह से लोगों को न्याय मिल पाता है। राजशाही में राजा को उनके पिता चुनाव करके राजगद्दी देते थे। प्रजा सिर्फ राजा के बनाए हुए कानून का पालन करते थे प्रजा के पास इतना भी अधिकार भी नहीं था जो राजा को चुन सके या राजा के विरुद्ध जा सके। आप इतिहास का अवलोकन करेंगे तो पाएंगे प्रजा राजा के जी हजूरी किया करते थे। राजा के विरुद्ध कोई साहसिक कदम उठाने का हिम्मत ही नहीं कर पाया। आज के युग में लोकतंत्र है और लोकतंत्र में शासक का चुनाव शासक वर्ग के द्वारा नही बल्कि प्रजा के द्वारा होता है। लोकतंत्र में शासक किसी भी प्रकार का मानहानि करने की कोशिश करता है तो जनता उसके खिलाफ आवाज उठाने लगती है जनता को ये अधिकार संविधान के द्वारा दिया जाता है। भारत के कुछ लोग संविधान को हटाकर राजशाही तंत्र की मांग करते हैं आप खुद चिंतन करके देखे राजशाही तंत्र में जनता को न्याय मिल पाएगा? हम भारत वासी को संविधान के खिलाफ जाने वाले लोगों से डटकर मुकाबला करने की जरूरत है तब ही भारत का संविधान सुरक्षित रह पाएगा नहीं तो ये लोग संविधान को हटाने की कोशिश करेंगे।
आज भारत के संविधान के पक्षधर लोगो को जरूरत है एकजुट होकर अपने संविधान को सुरक्षित करने के लिए संघर्ष करे। ताकि भविष्य में कभी राजशाही नहीं आये। राजशाही प्रजा, जनता के लिए घातक साबित होगा। कोई भी प्रजा राजा के विरुद्ध नहीं जा पाएगा। राजा को जो मन में आयेगा वैसा कानून बना देगा।
मैंने शदी के लेखक हजारी प्रसाद द्विवेदी की कहानी अशोक के फूल पढ़ा। उन्होंने उनमें लिखा था गुप्त वंश के बारे में आज से लगभग हजारों वर्ष पहले गुप्त वंश आया था जिसकी स्थापना श्री गुप्त ने किया था। भारत के काफी भू भाग पर गुप्त वंश का शासन रहा। गुप्त वंश के बारे में काफी लेखकों ने स्वर्ण युग और बौद्ध अनुयायियों का साम्राज्य कहा है गुप्त साम्राज्य 240 ई से 550 ई तक शासन किया। लेखक हजारी प्रसाद द्विवेदी अपनी कहानी अशोक के फूल में लिखते हैं नरपंतियों के लेखों में गुप्त वंश गुप्त सम्राटों का सेना दुसाध जाती का दुसाध्य साधनिक विशेष दस्ता था। गुप्त साम्राज्य का सेना दुसाध जाती का था। गुप्त वंश बिहार से शुरू हुआ है। बिहार, झारखंड, उत्तरप्रदेश नेपाल में दुसाध जाती ज्यादा निवास करते हैं। हालांकि हजारी प्रसाद द्विवेदी ने ये नही लिखा कि गुप्त वंश का शासक दुसाध जाती का था लेकिन गुप्त वंश का सेना को दुसाध जाती का बताया है। जब मैने अध्ययन किया तो अचंभित हो गया राजशाही में किसी वंश का सेना एक विशेष जाती वर्ग का है तो उसका शासक उसी वर्ग का क्यों नहीं हो सकता। आपको भी इसपर चिंतन मनन करने की जरूरत है।
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Good analysis
Acha lekh hai